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गीतों को जीवन मिलता था किशोर के सुर से

रवींद्र जैन के गीत सुन किशोर कुमार चौंके

राजेश झा
आज किशोर कुमार का जन्मदिन है तो उनके बारे में रवींद्र जैन द्वारा सुनायी कहानी याद आयी । वाया कोलकाता रवींद्र जैन संगीतकार बनने मुंबई आये थे और काम की तलाश में हारमोनियम लिए फिल्म – निर्माताओं के कार्यालयों की ख़ाक छानते रहते थे।इसी क्रम में उनकी भेंट रामरिख मनहर से हुई जो उन दिनों मुंबई साहित्याकाश के ध्रुवतारा मंचीय कवि थे।रामरिख जी ने रवींद्र जैन को एन एन सिप्पी से मिलवाया जो उनदिनों एक फिल्म के लिए संगीतकार की खोज में थे।सिप्पी साहब को रवींद्र जैन का लिखा गाना पसंद आया तो वे उनको किशोर कुमार के घर ले गए।किशोर कुमार ने रवींद्र जैन को देखते ही कह दिया -‘सिप्पी जी अपने पोजीशन का बेजा फायदा मत उठाइये , मैं नए संगीतकार के लिए गा सकता हूँ पर जिसने पहले किसी फिल्म के लिए म्यूजिक नहीं दिया है उसके साथ टाइम बिगड़ना संभव नहीं है।आप चाय पीजिये और जाइये।’ सिप्पी जी ने कहा -जब तक चाय पियूँगा आप रवींद्र जी के एक -दो गीत सुन लीजिये ‘ फिर किशोर जी की प्रतीक्षा किये बिना आदेश दिया – ‘रवींद्र जी सुनाइये कुछ ‘ .

रवींद्र जैन ने बिना अवसर गँवाए गाना शुरू कर दिया ‘घुंघरू की तरह बजता ही रहा हूँ मैं’ किशोर कुमार गीत के बोल सुनकर चौंक गए। फिर तो एक -के बाद दूसरी. ..तीसरा गण सुनते ही चले गए।जब रवींद्र जैन थोड़ी देर के लिए रुके तो किशोर कुमार उनके हाथ पकड़कर बोले -” स्टूडियो बुक करके मुझे इन्फॉर्म करना ,मैं आ जाऊंगा गाना रिकॉर्ड कराने , तुमको जिंदगी में कभी मेरा टाइम लेकर फिर स्टूडियो बुक करने की जरुरत नहीं है’। किशोर कुमार ने रवींद्र जैन के लिए गीत गाया किन्तु उनके संगीत-निर्देशन में रफ़ी का गाया गीत पहले रिलीज हुआ। इसका दुःख किशोर कुमार को हुआ पर शिकायत और कान खींचने के बाद भी वे उल्लसित होकर रवींद्र जैन के लिए गाने रिकॉर्ड करने आते थे।

किशोर कुमार सिनेमा की एक ऐसी हस्ती थे, जिनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। भले ही वह हमारे बीच में न हों लेकिन अपनी जादुई आवाज की वजह से वह आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं। किशोर कुमार के गाने जहां दिल छू लेते तो वहीं युवाओं दिलों की धड़कनों में जोश जगाने के लिए भी काफी थे। किशोर कुमार के गाए गाने आज भी लोग गुनगुनाते नजर आते हैं। किशोर कुमार न सिर्फ पेशेवर तौर पर बल्कि निजी जिंदगी में भी काफी मस्तमौला इंसान थे।

किशोर कुमार को ईश्वर ने बहु प्रतिभा से नवाजा था। वह एक अच्छे सिंगर तो थे ही साथ ही अभिनय में भी पीछे नहीं थे। इसके अलावा सबसे दिलचस्प बात थी कि वह महिला गायक की आवाज में भी गा सकते थे। साल १९६२ की फिल्म ‘हाफ टिकट’ का गीत ‘आके सीधी लगी दिल पे जैसी’ को किशोर कुमार ने मेल और फीमेल दोनों ही आवाजों में गाना गाया और इसमें सबसे खास बात ये थी कि उन्होंने इस गाने को एक बार में ही रिकॉर्ड कर लिया गया और ये गाना सुपरहिट साबित हुआ था। बता दें कि इस गाने को स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर गाने वाली थीं लेकिन किसी वजह से वह इसमें अपनी आवाज नहीं दे पाई तब किशोर कुमार ने ये गाना गाया।

किशोर कुमार की कल्पना की उड़ान भी बेहद अलग थी।अपने घर को लेकर उनका एक अलग सपना था, जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने अपने घर पर एक आर्किटेक्ट को बुलाया और कहा कि मेरे लिए ऐसा घर बनाओ जिसके हर कमरे में पानी-ही-पानी हो। वह यह भी चाहते थे कि उनके पलंग के पास एक नाव हो जिस पर बैठकर वे डाइनिंग हॉल तक जा सके।हालांकि उनका यह सपना पूरा नहीं हो पाया।किशोर कुमार बहुत ही मूडी किस्म के इंसान थे। जब उनका मन होता वह एक बार में गाना रिकॉर्ड कर लिया करते थे लेकिन मन न होने पर कितने भी पैसे दिए जाएं वह नहीं गाया करते थे।

किशोर कुमार ने अपने घर के बाहर एक साइन बोर्ड लगाया हुआ था, जिस पर लिखा था “बिवेयर ऑफ किशोर”। इससे जुड़ा एक किस्सा भी चर्चित है कि जब निर्माता-निर्देशक एचएस रवैल उनके घर में उनसे मिलकर बाहर निकल रहे थे तभी किशोर ने उनका हाथ काट लिया, जब रवैल ने पूछा तो किशोर ने जवाब दिया कि मेरे घर में घुसने से पहले आपको बोर्ड देखना चाहिए था।उन्होंने एक बार दोस्त से कहा की देख जब हम मरने वाले होंगे तब सारा पैसा अपनी छाती पर बांध लेंगे तब मरेंगे।

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