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‘लालसिंह चड्डा’ का सबक ,

फिल्म ‘लालसिंह चड्ढा’ के औंधे मुंह गिरने से देश ने कथित कॉमर्शियल हिंदी फिल्मों के नरेटिव्स पर प्रश्न खड़ा कर दिया है और यह विरोध इतना तीव्रतर है कि ‘पत्थरबाज’ समुदाय के हौंसलों पर ओले पड़ गए हैं। हिन्दू देवी -देवताओं के नंगे चित्र बनाकर राष्ट्रीय पुरस्कार और पद्मश्री जैसे सम्मान झटकनेवालों को झटका इस बात से भी लगा है कि भारतीयों ने अपनी सेना के गलत चित्रण को सिरे से नकार दिया है तथा ‘बुरे’ को ‘अच्छा’ साबित करने के फिल्मकारों के बिके जमीर के झांसे में आने से इंकार कर दिया है। भारतीय संस्कृति और सेना भारतीय फिल्मकारों के एजेंडे में है और वे इसको धुमिल करने में आगे रहते हैं। आमिर की ही फिल्म ‘फ़ना’ , शहीद कपूर की ‘हैदर’ ,ऋतिक रोशन -टाइगर श्रॉफ की फिल्म ‘वॉर’, मेघना गुलजार की फिल्म ‘राज़ी’ में पाकिस्तानी सैनिक को महान और भारतीय सेना को भ्रष्ट बताया गया है।अनुराग कश्यप की लगभग सारी फ़िल्में भारतीय संस्कृति को विद्रूप रूप में दिखाती हैं। शाहरुख खान की ‘रईस’ भी इस्लामी एजेंडे को बढ़ानेवाली फिल्म थी तो ‘पठान’ के बारे में भी कहा जा रहा है कि यह लवजेहाद को बढ़ावा देनेवाली फिल्म है। हिंदू लड़कियों में, जो कुतर्की ज्ञान बॉलीवूड और टीवी सीरियल द्वारा दिया जाता है, उससे सिर्फ “ लव जिहाद “ ही होता हैं।

हॉलीवुड की फिल्म ‘फारेस्ट गम्प’ में अपाहिज बच्चे का स्कूल में नामांकन करवाने के बदले में उसकी माँ को अपना शरीर फादर को सौंपना पड़ता है। चर्च का फादर उस विवश औरत का जंगली जानवर की तरह रेप करता है किन्तु उस फिल्म का अधिकार लेकर उसपर ‘लालसिंह चड्ढा ‘ नामक फिल्म टर्की में जाकर फिल्मानेवाले आमिर खान ने उसको दयालु फादर बताया है। भारत ही नहीं पूरे विश्व में ईसाई पादरियों द्वारा नन तथा छोटे -छोटे बच्चों से बलात्कार की घटनाएं बढ़ी हैं।इससे पादरियों और उसके पूरे तंत्र के विरुद्ध लोगों में क्रोध बढ़ रहा है।

विभिन्न देशों की सरकारों एवं प्रशासन द्वारा उनके विरुद्ध कठोर कार्यवाहियां की जा रही हैं और इससे मिशनरियों की छवि तेजी से खराब हो रही हैं।ऐसे में आमिर खान नामक फिल्मकार ‘फारेस्ट गंप’ नामक अमेरिकी फिल्म का अडॉप्टेशन ‘लालसिंह चड्ढा’ लेकर उतारा है। अगर उसने फिल्मकार के रूप में ईमानदारी दिखाई होती तो वह ‘फारेस्ट गम्प’ के कथ्य को उलटकर नया तथ्य नहीं बताता।भारत समेत अनेक देशों में ईसाई मिशनरियां ‘चंगाई’ कार्यक्रम द्वारा अंधविश्वास को बढ़ावा दे रही और मतांतरण करा रही हैं। ऐसे में उससे पूछा जाना चाहिए – इस फर्जी नरेटिव का कारण क्या है ?

एजेण्डाबाज आमिर ने ‘लालसिंह चड्ढा’ में बहादुर सिख समुदाय का अपमान और देश की सेना को भी कलंकित करने का काम किया है। उसने भारतीय सैनिक को कायर और मंदबुद्धि के रूप में चित्रित किया है। भारत में कारगिल की पहाड़ियों पर लड़ाई लड़ी जा रही थी हम विजय हुए जबकि फिल्म में केवल युद्ध भूमि से भागते हुए दिखाया गया है।जिस रणभूमि में भारत की सेना के लिए बलिदान शोभा है, उस रणभूमि में कायरों की तरह जान बचाकर भागना फिल्माया गया है। इसके अलावा राष्ट्र के आंतरिक आपदाओं में भी नागरिकों की सेवा में अपने प्राणों को संकट में डालकर देशवासियों को बचानेवाले राष्ट्रगौरव कहलानेवाले सैनिक के मुंह से यह कहलवाया है कि मुझे सैनिक बनाना अच्छा नहीं लगता।

जिस तरह से इस बात को प्रमुखता दी गयी है वह ग्लैमर देश में चल रहे अग्निवीर जैसे कार्यक्रमों को पलीता लगा सकता है , इससे देश को सैनिकों की कमी हो सकती है और टर्की -पाकिस्तान जैसे भारत विरोधी देशों का हित साध सकता है। यह किसी भी देश के लिए आपत्तिजनक बात है और इसको रेखांकित किया ही जाना चाहिए।वैसे इसने सट्टेबाज़ी से पूरी दुनिया में बदनाम हो चुके क्रिकेट को ‘लगान’ बनाकर नया जीवन दिया था यह नहीं भुला जाना चाहिए।

वैसे भूलना यह भी नहीं चाहिए कि फिल्मवालों ने डेढ़ पसली के अकबर को भीमकाय और महान बताने में सिनेमा और टेलीविजन माध्यम का दुरूपयोग कर इस्लामी नरेटिव को बढ़ावा दिया और उस अकबर को महान बताया जिसने हज़ारों मंदिर तुड़वाये , लाखों हिन्दुओं को मरवाया और उनपर बेशुमार अत्याचार किये जिसका उल्लेख अकबर द्वारा लिखवाये गए ‘अकबर -ए – आईना’ नामक सरकारी दस्तावेज में भी है।उसको महान बताते हुए लव-जेहाद जैसे इस्लामी एजेंडे चलाये गए और भाईचारा के नाम पर हिन्दुओं का दोहन तथा शोषण किया गया।आगे चलकर टेलीविजन और फिर वेब -सीरीज के माध्यम से इस्लामीकरण – लवजेहाद – हिन्दुओं का मतांतरण जैसे कामों को बढ़ावा दिया गया। उसमें मुस्लिम लडके को इतना महान बताया जाता है कि भोली -भली , बालिकाएं और किशोरियां उनके प्रेमपाश में फंस जाती हैं।

‘लालसिंह चड्ढा ‘की विफलता इस बात का सूचक है कि राष्ट्र अब अपने उपहास के लिए तैयार नहीं है।फिल्मों और धारावाहिकों में हिन्दू पूजा-दर्शन और जीवन-पद्धति के उपहास करनेवाले अब दण्डित किये जायेंगे। एजेण्डाबाज़ आमिर खान का दोहरा चरित्र सामने आ चुका है फिर भी हिन्दुओं ने अद्भुत शालीनता का परिचय दिया है।उसने न कोई फतवा जारी किया न ‘सर तन से जुदा ‘ का शोर मचाया न कोई धमकी दी न ही कोई गर्दन काटी, बड़ी सहजता से हिन्दुओं का मजाक उड़ानेवाले और देश के विरुद्ध सॉफ्ट -एजेंडा चलनेवाले आमिर खान की चूलें उसने आर्थिक बहिष्कार द्वारा हिला दी हैं जिससे ३५०० स्क्रीन्स पर १०,००० शोज की बुकिंग एवं बम्पर एडवांस बुकिंग के झूठे प्रचारों के बाद भी,’लालसिंह चड्ढा’ के विफल प्रीमियर से इतनी हताशा फैली कि ६,००० शोज रद्द हो गए और इस फिल्म को प्रदर्शित करनेवाली कम्पनी पी वी आर को शेयर बाज़ार में लगभग ४०० करोड़ का झटका लग गया।

अर्जुन कपूर जैसे कुछ फ़िल्मी लोगों ने दर्शकों को डराना- धमकाना प्रारम्भ कर दिया है फिर भी हिन्दुओं ने देश और समाज की भावनाओं के विरुद्ध बनी फिल्मों का विरोध करते हुए भी कभी शालीनता नहीं छोड़ी।हिन्दुओं का व्यवहार सभ्य है और यह सभ्य तरीके से विरोध करना इसके आचरण का हिस्सा है। दुनिया के शेष लोग हिन्दुओं से यह गुण सीख सकते हैं।

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